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इस्लामी मआच्चरे में इंटरनेट की जरूरत व अफादियत

सांईस और टेक्नालॉजी के इस दौर में जराये इबलाग यानि मीडिया की बड़ी अहमियत व अफादियत है । दुनिया के हालात से बाखबरहोने और इन हालात में अपनी च्चिनाख्त व तच्चखस को बाकी रखने और अपने आपको जिंदा रखने के लिये जरूरी है कि उम्मते मुसलेमा इन जराये इबलाग से बखूबी आगाह हो और जहॉं तक मुमकिन हो इनका इस्तेमाल करें ।
मीडिया के जैल में बहुत सारी चीजें आती हैं । टीवी, कम्प्यूटर, अखबारात व रसाईल व जराईद सर्विसेज ब्राड बैंड इसी मीडिया की ही कड़ियॉं हैं और अब इनमें सरेफहरिस्त हैं-जिसकी एजाद जहॉं बहुत ताज्जुबखेज और हैरतअंगेज है वही आज हमारी समाजी व सकाफती जिंदगी का जुज्वे लाजिम भी है । मैदाने तालीम हो या एकतेसादियात व मआच्चियात सियाहत व तफरीह हो या मैदाने तिजारत और कारोबार इंसानी जिंदगी का ऐसा कौन सा शोबा है जहॉं इंटरनेट की जरूरत न हो मौजू पर मालूमात बहम पहुॅंचा देना इंटरनेट का ही खासा है । इंटरनेट में आज वह आसानियॉ फराहम कर दी हैं जो कुछ अर्से पहले तसव्वुर से बालातर थी । बैंकिंग इंटरनेट और उस जैसी हजारों सहूलतें इस पर दस्तियाब हैं लिहाजा यि ेनिा गंता न होगा कि मौजूदा ग्लोबसाईजेच्चन इंटरनेट की वजह से ही मुमकिन हुआ ।
लेकिन जिस तरह ह तस्वीर के दो रूख होतं हैं मुसबत और मनफी (सकारात्मक व नकारात्मक),सही और गलत इसी तरह इंटरनेट इंसानी दिमाग का करिच्च्मा और सांईस का एक जबरदस्त तोहफा जरूर है लेकिन हम सब जानते हे। कि किसी भी एजाद को उसका इस्तेमाल को गलत या सही बनाता है इस पहलू से देखें तो आज मिडिया के दीगर आलात की तरह इंटरनेट भी गलत हाथों में है जो इस मुफीद एजाद को जर्दरसॉं बना रहे हैं । मआच्चरे में जिन्सी बेराहरवी, बेहयाई और उरियानियत को बढ़ावा देने वाले अपने घटिया मकासिद के तहत बेखौफ व खतर इसका इस्तेमाल करते हैं उन्हीं के बारे में कुरआन कहता है कि ये वह लोग हैं जो फह्हाच्ची फेलाना चाहते हैं बुराईयों को उरयानियत को घर-घर आम करना चाहते हैं।
कुरआन बिल्कुल ठीक कहता है कि आज उरियॉं तसावीर, जिन्सी कारोबार और फहच्च लिटरेचर बआसानी इंटरनेट पर फराहम किया जा रहा है कहीं महज तफरीह के नाम पर तो कहीं सांईस व मालूमात के नाम पर मुख्तलिफ वेबसाईट पर फह्हाच्ची का बाजार गरम है ये इंटरनेट का गलत इस्तेमाल है और सिर्फ इतना ही नहीं जरा और गहराई में जायें तो पता चलता है कि आज इंटरनेट पर अस्सी प्रतिच्चत इस्लाम दुच्च्मन अनासिर का कब्जा है जो इस्लाम को आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते इसलिये वह इस एजाद के जरिये लोगों के जहनों में इस्लाम के खिलाफ जहर भर रहे हैं ।
आज ऐसी हजारों वेबसाईट काम कर रही हैं जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ इस्लाम को बदनाम करना और इसके खिलाफ प्रोपोगंडा करके लोगों को दीने इस्लाम से मुतनफर कर देना है । एक अकाबिर ने तीस ऐसी वेबसाईट का जिक्र किया है जिसके जरिये इस्लाम और पैगम्बर हजरत मोहम्मद सल्ल. की शख्सियत को मजरूह करने वाला मवाद शाया किया जाता है। इन वेबसाईट को एक सऊदी तालिबे इल्म ने तबाह किया है । ये तमाम वेबसाईट डेनमार्क की थीं । इस्लामी मआच्चरे पर इंटरनेट का यह मनफी पहलू है जो इंतेहाई जद्ररसॉं हैं । ये तो सिर्फ एक मिसाल है । तफसील में जायें तो हजारों और लाखों यहूदी और ईसाई मिच्चनरीज इंटरनेट के जरिये राज-दिन इस्लाम मुखालिफ प्रोपोगंडा करने में मसरूफ हैं लेकिन महज कफअफसोस मिलने से कुछ हासिल नहीं होगा।
मजहबे इस्लाम सिर्फ मस्जिदों और मदरसों और खानकाहों तक ही महदूद नहीं हैं बल्कि एक बैनुल अकवामी उम्मत है ओर आज यही उम्मत अपने दुच्च्मनों की खतरनाक सियासी, समाजी और मजहबी साजिच्चों के निच्चाने पर है लिहाजा जरूरी हो गया है कि मुसलमान बेदार हों वह सिर्फ इंटरनेट से ही बखूबी वाकिफ न हों बल्कि जहॉं तक मुमकिन हों इसको अपने इस्तेमाल में लायें । कुरआन यही तो कहता है कि दुच्च्मनों के लिये ताकत भर तैयारी कर लो ।
मौजूदा जमाने में इंटरनेट ओर दीगर जराये इबलाक जिनकी हथियारों से ज्यादा बड़ी ताकत है लिहाजा हम सबको कमरबस्ता होकर इस जदीद टेक्नालॉजी को हुकूमत के साथ अपने दिफा में इस्तेमाल करना चाहिए इस सूरत में हुक्म खुदावंदी की तामिल हो सकेगी इसके अलावा एक-दूसरे जाविये से गौर करें तो मुसलमान कमाहुक्का दावत है ओर इस उम्मत के हर फर्द की जिम्मेदारी है कि वह फरीजएदावत अंजाम दे और पूरी दुनिया को अल्लाह और अल्लाह के दीन की तरफ बुलाये ।
लिहाजा कुरआन तमाम मोमेनीन को मुखातिब करते हुए कहता है कि अपने रब की तरफ दावत दो हिकमत के साथ ओर बेहतरीन नसीहत बेहतरनीन गुफ्तगू के साथ तो ये दावत बजरिया हिकमत बहुत आम ताबीर है जिसके अंदर यह तमाम कदीम व जदीद वसाईल व जराये आ जाते हैं जो दूसरों तक अपनी बात पहुंचाने में मआव्वुन व मददगार हैं, लिहाजा एक दाई के लिये जरूरी हो गया है कि अब वह सिर्फ गुफ्तगू, खिताबत और तहरीर पर ही इक्तेफा न करे बल्कि जदीद टेक्नालॉजी और खासतौर से मीडिया को दावत व तबलीग के लिए इस्तेमाल करे और लोगों तक अपनी बात और अपने पैगामात पहुंचाये कि यही वह दावत बजरिए हिकम्मत है जिस पर कुरआन जोर देता है ।
ऐसा नहीं है कि मुसलमान बिल्कुल ही बेदार नहीं है या इंटरनेट को जानते ही नहीं और इसका इस्तेमाल नहीं करते । हमारे सामने ऐसी मिसालें मौजूद हैं जो हमें इंटरनेट और जदीद टेक्नालॉजी के इस मैदान में मुसलमानों की बेदारी और उनकी कोच्चिच्च व जद्दोजहद का पता देती हैं और इस्लामी मआच्चरे पर इंटरनेट के सही असरात को साबित करती है । एक अखबारी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की मजहबी तन्जीमें मगरीबी मुमालिक के मुसलमानों को ईदुलअजहा के लिय जानवर खरीदने और जिबह करने की सहूलत इंटरनेट पर फराहम कर रही है इसे अलावा बहुत सी ऐसी इस्लामी वेबसाईट्स मुसलमानों ने बनाई है जिस पर इस्लाम के मुताल्लिक मुकम्मल मालूमात फराहम की जाती हैं ओर इस्लामी लिटरेचर भी पेच्च किया जाता है लेकिन इंटरनेट पर हमारी ये खिदमात अभी बहुत कम है इस्लाम मुखालेफीन की कोच्चिच्चों के मुकाबले में हमारा इतना सब सिर्फ बीस प्रतिच्चत है यही वजह है कि इनका असर रसूख हमसे कहीं ज्यादा है ।
इसलिये जरूरत इस बात की है कि हम इनके सिर्फ शानाबच्चाना ही चलें बल्कि इनसे आगे बढ़कर इंटरनेट को अपने इस्तेमाल में लाये ंतब ही हम उनकी साजिच्चों से महफूज रह सकेंगे और दुनिया में अपना फरीजए दावत भी अंजाम दे सकेंगे ।

 

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