see
PDF
Version
| इस्लामी बैंकिग
इस्लामी बैंकिंग का विकास और हिन्दुस्तान में संभावनाए।
(सैय्यद इलियास बादच्चाह)
मआच्चियाती कॉलम नवीस मिस्टर रोजर कोपर ने आलसी मालियाती मैग्जीन 'यूरोमनी';म्नतवउवदतलद्ध के नवम्बर १९८१ के अंक में एक लेख बउनवान 'एक हाथ में कैल्कुलेटर और दूसरे कुरआन, मुफ्ती साहेबान अब इस्लामी बैंक चलाएंगे ! लिखा था और इन दिनों मौजूद चंद इस्लामी बैंकों की तरफ इच्चारा करते हुए राय कायम की थी कि इस्लामी बैंको का ये नजरिया दरअसल मगरीब के इस्तेमारी कुव्वतों के मालियाती निजाम के खिलाफ एक आरजी व वक्ती रदेअमल है ओर ये कि तजादात से भरे ये इदारे मौजूदा आलम में राईस सूदी मालियाती निजाम का मुतबादिल भला क्यों कर फराहम कर पाएंगे । लानते सूद से पाक और नफा व नुकसान में च्चिरकत के बुनियादी इस्लामी उसूलों से हमाहंग ये इस्लामी मालियाती इदारे जो कि इस्लामी बैंको, इस्लामी मैचुअल फंड्स ओर इस्लामी इंच्चोरेंस (तकाफुल) कंपनीयों पर मुच्चतमिल है, आज न सिर्फ बतौर एक कामिल मुतबादिल, बल्कि असरी सूद पर मुबनी बैंकों के लिए एक कामयाब चैलेंज की शकल में उभर कर उफ्केआलम पर छा रहे हैं । इस निजाम की अफादियत की तौसीक अकवामें मुत्तहेदा के बैनुल अकवानी मालियाती फंड (आई.एम.एफ.) में भी कर दी है । चुनांचे आई.एम.एफ. की एक रिपोर्ट के मुताबिक शरियते इस्लामी के मुताबिक कारकर्द बिलासूदी बैंकिंग निजाम आम सूदी बैंकों की बनिस्बत ज्यादा मालियाती झगड़ों और नुकसानात को बरदाच्च्त करने और जज्ब कर लेने की सलाहियत रखता है । (इंटरनेच्चनल मानिटरी फंड, स्टाफ पेपर्स १९८६ जिल्द, ३२,नवम्बर-१, बहवाला इंडियन एक्सप्रेस) । खुद कथित जरीदा 'यूरोमनी' ने हाल ही में 'दुबई इस्लामीक बैंक' को शानदार कारकर्दगी पर एवार्ड से नवाजा है ।
इंटरनेच्चनल इस्लामि फायनेंच्चियल फोरम के फराहम करदा आंकड़ो के मुताबिक जायदअज १२७० इस्लामी बैंक आज दुनियां में कारकर्द हैं । जिन्होंने जायदअज १३ बिलियन डॉलर का सरमाया कारोबार में लगा रखा है । इस बैंकों का मजमूई सरमाया २६५ बिलियन डॉलर (अमेरिकी) से तजावुज कर चुका है और इनके मजमूई डिपाजिट २०२ बिलियन डॉलर (अमेरिकी) है। इसमें सालाना दस से बीस प्रतिच्चत का औसतन इजाफा आलमी सतह पर पाया जाता है । इस्लामी इक्विटी मार्केट आलमी सतह पर अब तीन बिलियन डॉलर से जयादा है जिसमें कि पिछलें सात साल से औसतन २५ प्रतिच्चत का इजाफा देखा गया है। इस्लामी इंच्चोरेंस (तकाफुल) का मजमुई प्रिमियम लगभग ३ बिलियन डॉलर है । अरब मुमालिक में ये निजाम बेहद मकबूल है और इसमें वहां सालाना १५ से २० प्रतिच्चत का इजाफा हो रहा है । यही नहीं कि इस्लामी बैंको का निजाम गैर मुस्लिम सरामायादारों में भी रोजअफरोज मकबूल होता जा रहा है इसलिये इन बैंकों के नफा में सरमाया लगाने वालों में तकसीम की शरह आम बैंकों की शरह सूद से ज्यादा ही है ।
शरियते इस्लामी में सूद की हुरमत अजहरमुच्च्च्चम्स हैं । इस्लामी कवानीन की मुताबेअत में नफा व नुकसान में च्चिराकत के उसुलों पर मुबनी इस्लामी बैंक की तहसीक सितंबर १९६३ में मलेच्चिया में शुरू हुई जब की 'वांगसम्पानान बकुल बकुल हाजी' का क्याम अमल में आया हैं । इमदादबाहमी फंड की शकल में कायम इस इस्लामी मालियाती इदारे का मकसद आजमीनेहज को बैतुल्लाह के खर्च में बचत के जरिये एखराजाते हज की कमी कर मदद करना था । १९६९ में ये इदारा तरक्की करके 'ताबुंग हाजी' ;ज्ंइनदह भ्ंरपद्ध बना और खूब शोहरत पाई । आज इसकी मुल्क में कई सनती इदारे और बड़े हमामंजिला तिजारती काम्प्लेक्स हैं । उन्हीं दिनों मिस्र में महदूद सतह पर तबकाती बाहमी तआव्वुिन व तरक्की के उनवान पर और अव्वम में बचत को फरोग देने की गरज से 'मेतगमर' १९६३ में कायम हुआ और खूब तरक्की भी की मगर बंद हो गया । मअन 'नासिर सोच्चल बैंक १९७१ और 'फैसल इस्लामी बैंक' १९७७ में वजूद में आये । पड़ोसी मुल्क सूडान में 'फैसल इस्लामी बैंक ऑफ सूडान' १९७७ में और बहरीन इस्लामी बैंक' १९७४ में कायम हुए । कमर्च्चियल खुतूत पर कायम होने वाला पहला बैंक 'दुबई इस्लामी बैंक' हैं जो १९७३ में कायम हुआ और जिसके क्याम में कई अरब रऊसा की काविच्चें कारे फरमां हैं । आज ये दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामी बैंक जिसने अपनी कारकर्दगी से एक तारीख बना ली हैं । इन्हीं दिनों हुकूमत कुवैत ने 'कुवैत फाईनेन्स हाऊस' कायम किया । मुस्लिम मुमालिक ने शरई खुतून पर मुस्लिम मईच्चतों की तच्चकील में रहबरी व इआनत नीज बाहमी तआव्वुन व इच्च्तेराक के मकसद से तनजीम इस्लामी मुमालिक (ओ.आई.सी.) ने 'इस्लामी तरक्किसरती बैंक की जद्दा में दाग बेल डाली । सभी मुस्लिम देच्च इसके मेंबर हैं । इस्लामी तरक्कीयाती बैंक के क्याम और इसके तआव्वुन से मुखतलिफ मुस्लिम मुमालिक ने अपने अपने मुल्क की मईच्चत में इस्लामी उसूलों को लागू करने की इबतेदा की इस्लामी बैंकों की कई मुमालिक ने इबतेदा भी की ।
इस्लामी निजामें मईच्चत को अपनाने में मलेच्चिया को कलीदी मुकाम हासिल हैं । यहां पहला इस्लामी बैंक 'बैंक इस्लाम मलेच्चिया बरहाद' (बी.आई.एम.बी.) १९८३ में कायम हुआ और फिर एक के बाद दिगरे कई इदारे कायम हुए । हुकूमत ने इसकी अफादियत व असर अंग्रेजी के पेच्चेनजर १९९४ में इस्लामी बैंकिंग इस्कीम का कानून बनाना । कानून के तहत मुल्क के मर्कजी बैंक 'बैंक निगारा मलेच्चिया' में 'कौमी शरिया मच्चावेरती कौंसील' कायम की गई की जो कि मुल्क के सभी इस्लामी बैंकों की कारकर्दगी व निगरानी की जिम्मेदार हैं । इसकी कानून के तहत इस्लामी बैंकों को अपने फंड को सूदीकारोबारी बैंकों से मआमलत करने से दूर रखने का पाबंद कर दिया गया । इन्हीं जुरअत मंदाना एकदामात ने मलेच्चिया को ऐसा मुनफरिद व काबिजे तकलीद मुल्क बना दिया हैं जहां मईच्चत (अर्थव्यवस्था) में इस्लामी मालीयाती निजाम रिवायती मालीयाती निजाम के शाना बच्चाना काम कर रहा हैं और कामीयाब मुतबादिल के तौर पर उभरा हैं । मेलिच्चिया में इन दिनों इस्लामी फंड्स के कारोबारी बीअ व शरीया के लिए इस्लामी कैपिटल मार्केट भी कायम हैं । इन्टरनेच्चनल हौराल्ड ट्रिब्यून की इत्तेला के मुताबिक हुकूमत मलेच्चिया, इस्लामी खतूत पर सभी मुस्लिम मुमालिकका आलमी तिजारती ब्लाक बनाने के लिए सरगर्म हैं और इस मकसद के लिए ११ बिलियन डॉलर के इन्फ्रइस्ट्रक्चर फंड की तजवीज मेम्बर मुमालिक के जेरे गौर हैं ।
मतमूल अरब मुमालिक में अब तक दर्जनों इस्लामी बैंक, इस्लामी फंड्स और इस्लामी इन्च्चोरेन्स कंपनियां (तकाफुल) कायम हो चुकी हैं । मगरीबी मुमालिक के सूदी तिजारती बैंकों ने मुकामी इच्च्तेराम से कई इस्लामी बैंक/फंड्स कायम किये हैं । चन्द बैंकों ने अपनी कालब ही को बदल कर इस्लामी बैंक बना लिया हैं । खलीज अरब में काम करने वाले बैांकें को 'अरबरकादल्ला' और 'दारूलमाल' दो ऐसे इस्लामी मालियाती ग्रुप हैं जिनका बिलतरतीब बहरीन और कुवैत से ताल्लुक हैं मगर उन्होंने बिलच्चमूल यूरोप के कई मुमालिक ने अपने मालियाती इदारे या शाखें कायम हैं ओर एक तरह से ये मल्टीनेच्चनल इस्लामी बैंक बन कर उभरे हैं ।
रोज अफजूं तेजी से तरक्की की राह पर गामजन इस्लामी बैंकों के लिए अफरादी कुव्वत ही तरबीयत के मकसद से जद्दा में इस्लामी तरककीयाती बैंक ने १९८२ में' इस्लामिक रिसर्च एंड टे्रनिंग इंस्टीटयूट' कायम किया जो कि न सिर्फ तालीम व तरबियत बल्कि बतौर इच्चाअरती इदारा काबिल कद्र खिदमात अंजाम दे रहा हैं । इस्लामी बैंकों के अपने हिसाबात के तख्ते (बैलेन्स शीट) मुनफरिद नोइयत के होते हैं । इनमें आलसी सतह पर यकसानियत पैदा करने, आलमीयाने के जदीद तकाजों के लिए इस्लामी बैंकों को तैयार करने, नई मालियाती इकाईयो थ्पदंदबपंस प्देजतनउमदजे को अव्वासी जरूरियात के मुताबिक ढालने की बढ़ती जरूरियात के पेच्चे नजर बहरीन में 'एकाउंटिंग एंड आडिटिंग आर्गनाईजेच्चन फार इस्लामी फाइनेंच्चियल इंस्टीटयूच्चंस' कायम किया गया । इसी तरह एक और तनजीेमी इदारा 'जनरल कौंसिल फार इस्लामिक बैंक्स एंड फाइनेंच्चियल इंस्टीटयूच्चंस' भी बहरीन ही में कायम हुआ । मच्चहूर आलमी कैपीटल मार्केट इदारा 'डोजोन्स' ने १९९९ में अपना इस्लामी मार्केट इन्डैक्रा (हिसारा इच्चारिया) क्श्रप्डप् बहरीन ही में कायम किया जो कि शरियते इस्लामी के अनुसार कायम करदा ६०व० कंपनीयों के हिसास इच्चारिया पर मुच्चतमिल हैं । यूं बहरीन आलमी सतह पर इस्लामी बैंकों के एक मरकज के तौर पर उभरा हैं ।
वाजेह रहे कि बेच्चतर इस्लामी बैंक अव्वासी सतह पर मतमूल अफराद खानदानों की जानिब से कायम किये गये हैं । मलेच्चिया, ईरान, सूडान, पाकिस्तान और कुवैत में हुकूमती सतह पर ये निजाम मरकजी बैंक की जानिब से मुकम्मल निगरानी की सहूलत के साथ मुल्की मालियाती कवानीन में तरभीम के जरिये मुतवाजी सतह पर कायम हैं। अकसर इस्लामी बैंक इन दिनों शरई उसूलों पर मुबनी मुराबहा, मजारबा, मच्चारका, इजारा, बीअसलम, इसतसना जैसी मारूफ मालियाती स्कीमों के अलावा इस्लामी इकविटी फन्ड, बॉन्ड्स और सकूक जैसी स्कीमों को रूबएअमल ला रहे हैं । एक इत्तेला के मुताबिक इस्लामी इन्वेस्टमेन्ट फंड्स के निजाम ने तरक्की का एक रिकॉर्ड बनाया हैं । पिछले सात साल में ये सनत सालाना २५ प्रतिच्चत की शरह से तरक्की दर्ज करा रही हैं ।
मुखतलिफ इस्लामी बैंकों नें दर्जे बाला स्कीमों के खतूत पर बचत (सेविंग्स) अमानत (करंट) और इनवेस्टमेंट (फिक्स्ड) के जरिए मुखतलिफ सहूलियात फराहम करते हुए अव्वास से स्कूम तलब व जमा करने का रास्ता इख्तयार किया है और फिर वसूलच्चुदा रकूम शरियत के वजा करदा और बैंक के शरियत बोर्ड से मंजूरच्चुदा खतूत पर मुआहेदा करते हुए तिजारती, सनती वगैरह मकासिद के लिए मुहैया करते हैं । आम बैंकों के बरखिलाफ एक इस्लामी बैंक बतौर एक अमीन, साथी शानाबच्चाना फआल किरदार अदा करता है और हर खातादार के साथ तहरीरी मुहायदा करते हुए मुकर्ररा म्यादों पर नफा या नुकसान में शरीक होता है । इस्लामी बैंकों के दायरा अमल में न सिर्फ तिजारती व मनफेअती बल्कि फलाही व खिदमाती कारेखैर भी शामिल है । जकात की रकूम के हुसूल व तकसीम, कर्जेहसना के इजरा, मुस्तहकीन को तालीमी वजाइफ के इजरा, उलूस कुरआनिया व दीनिया की इच्चाअत व तौसीअ में तआव्वुन कई इस्लामी बैंकों की सरगुजच्च्त से अयां हैं । तबकाती एतेबार से भी इसकी फराहमी माल की खिदमात अच्चियाए माएहताज की खरीदारी (कन्ज्यूमर लोन) में तआव्वुन, जरई अकराज के इजरा से निकलकर सनतों के क्याम, भारी सनतो ंके क्याम में तआव्वुन और हवाई जहाजों की खरीदारी में च्चिराकत तक जा पहुंची है । शरई एतेबार से ममनूअ अच्चिया के अलावा तम्बाकूसिनेमा और मुताल्लेका सनतों और जंगी सामान की खरीद व सनत में इस्लामी बैंक का तआव्वुन खारिज अज फेहरिस्त है । खलील में मकान, फ्लैट कार की खरीदारी जैसे कर्ज आम हैं जबकि बंग्लादेच्च जैसे गरीब मुस्लिम मुल्क में जहेज के लिए बचत में तआव्वुन, सफरेहज बैतुल्लाह के लिए बचत व तआव्वुन की स्कीमें मकबूल हैं । वाजेह रहे कि किसी भी इस्लामी बैंक के लिए अपनी पॉलीसियों और स्कीमों, निज खातों पर मुनाफा या नुकसान की तकसीम जैसे अमल के मुआयना व मंजूरी के लिए माहेरीन कवानीन शरिया व मुक्तियान पर मुच्च्तमील शरिया बोर्ड रखना लाजमी है । कई उल्मा व मुक्ती हजरात एक से जायद इस्लामी बैंकों से बतौर शरिया बोर्ड मेम्बर मुनसलिक हैं । बर्रेसगीर के जय्यद व मच्चहूर आलिम मुक्त्ि व जस्टिम मोहम्मद तकी उस्मानी साहब ऐसी ही आलमी शख्सियतों में से एक हैं ।
इस्लामी बैंको की कारकर्दगी और मकबूलियत का असर
आम बैंकों ने भी इस्लाम के उसूलों के ताबे स्कीमें बजा करके अलहैदा सेक्च्चनर सेसंउपब ॅपदकवूे कायम कियें हैं। कई मगरीबी बैंकों ने दूसरे मुकामी बैंकों के साथ इच्च्तेराक करते हुए खलीज में इस्लामी बैंक व इस्लामी फंड्स कायम कियें हैं । खुद यूरोप व अमेरिका ओर आस्ट्रेलिया में भी इस्लामी मालियाती इदारे कायम हुए जिनकी खूब पजीरायी भी हुई । इस्लामिक फायनेंस हाऊस, लग्जंबर्ग (१९७८) पहला इस्लामी इदारा था जो किसी मगरिबी मुल्क में कायम हुआ ।
मअन इस्लामिक बैंक इन्टरनेच्चनल ऑफ डेनमार्क, कोपनहैेगन में और इस्लामिक इनवेस्टमेंट कंपनी मैलबोर्न
|